PM Awas Yojna 2026: को लेकर इस साल एक बार फिर चर्चा तेज है, खासकर बिहार में। सरकार का मकसद साफ है कि जिन परिवारों के पास अब तक पक्का घर नहीं है, उन्हें योजना के तहत लाभ दिया जाए। लेकिन बिहार में इस योजना से जुड़ी खबरें थोड़ी चिंता भी बढ़ा रही हैं। फंड की कमी के चलते लाखों घरों का निर्माण अधूरा बताया जा रहा है, वहीं लाभार्थी सूची और किस्त भुगतान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में 2026 में बिहार के लिए पीएम आवास योजना सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि लाखों गरीब परिवारों की उम्मीद बनी हुई है।
PM Awas Yojna 2026: बिहार में क्या है स्थिति
प्रधानमंत्री आवास योजना 2026 को लेकर बिहार में इन दिनों लगातार खबरें सामने आ रही हैं। यह योजना उन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए है, जिनके पास अब तक पक्का घर नहीं है। सरकार का दावा है कि योजना के तहत लाखों परिवारों को घर मिल चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत में अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।
बिहार में पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के तहत अब तक लाखों घर बनाए जा चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 40 लाख से ज्यादा परिवारों को पक्का घर मिल चुका है। वहीं, नए चरण में करीब 12 लाख और परिवारों को योजना से जोड़ने की तैयारी चल रही है।
हालांकि, दूसरी ओर यह भी सामने आया है कि करीब 9 लाख से अधिक घरों का निर्माण अधूरा पड़ा है। इसकी मुख्य वजह केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि में देरी बताई जा रही है। फंड न मिलने के कारण कई जिलों में काम रुक गया है और लाभार्थी अधूरे मकानों में रहने को मजबूर हैं। राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर केंद्र से हजारों करोड़ रुपये की राशि जारी करने की मांग की है।
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क्या बदला और क्यों चर्चा में है योजना
पीएम आवास योजना 2026 में बिहार के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि लाभार्थियों की सूची का दोबारा सत्यापन किया जा रहा है। जांच में कई जगहों पर यह पाया गया कि बड़ी संख्या में आवेदक पात्र नहीं हैं। अनुमान है कि करीब 40 प्रतिशत तक नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। वहीं, प्रशासन का कहना है कि जो लोग वास्तव में पात्र हैं और जिनका नाम छूट गया है, उनका नाम सत्यापन के दौरान जोड़ा जा सकता है।
कुछ जिलों से योजना में गड़बड़ी और अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसको लेकर प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
कुल मिलाकर, PM Awas Yojna 2026 बिहार के लिए सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि लाखों गरीब परिवारों के लिए उम्मीद का सहारा बनी हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि फंड कब जारी होता है और अधूरे घरों का काम कब दोबारा शुरू होता है।









